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व्यवसाय में सफलता का सटीक अध्ययन शिक्षा पूर्ण होने के पश्चात अक्सर युवाओं के मन में यह दुविधा रहती है कि नौकरी या व्यवसाय में से उनके लिए उचित क्या होगा। इस संबंध में जन्मकुंडली का सटीक अध्ययन सही दिशा चुनने में सहायक हो सकता है। * नौकरी या व्यवसाय देखने के लिए सर्वप्रथम कुंडली में दशम, लग्न और सप्तम स्थान के अधिपति तथा उन भावों में स्थित ग्रहों को देखा जाता है। * लग्न या सप्तम स्थान बलवान होने पर स्वतंत्र व्यवसाय में सफलता का योग बनता है। * प्रायः लग्न राशि, चंद्र राशि और दशम भाव में स्थित ग्रहों के बल के तुलनात्मक अध्ययन द्वारा व्यवसाय का निर्धारण करना उचित रहता है। * प्रायः अग्नि तत्व वाली राशि (मेष, सिंह, धनु) के जातकों को बुद्धि और मानसिक कौशल संबंधी व्यवसाय जैसे कोचिंग कक्षाएँ, कन्सल्टेंसी, लेखन, ज्योतिष आदि में सफलता मिलती है। * पृथ्वी तत्व वाली राशि (वृष, कन्या, मकर) के जातकों को शारीरिक क्षमता वाले व्यवसाय जैसे कृषि, भवन निर्माण, राजनीति आदि में सफलता मिलती है। जल तत्व वाली राशि (कर्क, वृश्चिक, मीन) के जातक प्रायः व्यवसाय बदलते रहते हैं। इन्हें द्रव, स्प्रिट, ...
चतुर्थ स्थान से जानें आशियाने का सुख अपना घर बनाना और उसमें सुख से रहना हर व्यक्ति का सपना होता है, मगर कई बार अथक प्रयत्नों के बावजूद या तो घर ही नहीं बन पाता, यदि बन जाए तो उसमें रहने पर सुख-शांति नहीं मिलती। आपके भाग्य में घर का सुख है या नहीं, इस बारे में कुंडली से स्पष्ट संकेत मिल सकते हैं। घर का सुख देखने के लिए मुख्यत: चतुर्थ स्थान को देखा जाता है। फिर गुरु, शुक्र और चंद्र के बलाबल का विचार प्रमुखता से किया जाता है। जब-जब मूल राशि स्वामी या चंद्रमा से गुरु, शुक्र या चतुर्थ स्थान के स्वामी का शुभ योग होता है, तब घर खरीदने, नवनिर्माण या मूल्यवान घरेलू वस्तुएँ खरीदने का योग बनता है। गृह-सौख्य संबंधी मुख्य सिद्धांत 1 . चतुर्थ स्थान में शुभ ग्रह हों तो घर का सुख उत्तम रहता है। 2 . चंद्रमा से चतुर्थ में शुभ ग्रह होने पर घर संबंधी शुभ फल मिलते हैं। 3 . चतुर्थ स्थान पर गुरु-शुक्र की दृष्टि उच्च कोटि का गृह सुख देती है। 4 . चतुर्थ स्थान का स्वामी 6, 8, 12 स्थान में हो तो गृह निर्माण में बाधाएँ आती हैं। उसी तरह 6, 8, 12 भावों में स्वामी चतुर्थ स्थान में हो तो गृह सुख बाधित हो जाता है। 5 ....
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जन्मपत्रिकामेंशिक्षाकेयोग आज जीवन के हर मोड़ पर आम आदमी स्वयं को खोया हुआ महसूस करता है। विशेष रूप से वह विद्यार्थी जिसने हाल ही में दसवीं या बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है, उसके सामने सबसे बड़ा संकट यह रहता है कि वह कौन से विषय का चयन करे जो उसके लिए लाभदायक हो। एक अनुभवी ज्योतिषी आपकी अच्छी मदद कर सकता है। जन्मपत्रिका में पंचम भाव से शिक्षा तथा नवम भाव से उच्च शिक्षा तथा भाग्य के बारे में विचार किया जाता है। सबसे पहले जातक की कुंडली में पंचम भाव तथा उसका स्व...
ग्रह निर्धारित करते हैं आपका व्यक्तित्व (भाग 3) पिछले दो लेखों भाग 1 और भाग 2 के माध्यम से आपने यह जाना कि मानव मस्तिष्क जो कि ज्योतिष अनुसार 42 विभिन्न केन्द्रों मे विभाजित है, जिन के द्वारा मनुष्य के अन्दर विभिन्न प्रकार के गुण-दोषों का विकास होता है। अब इस पोस्ट के जरिए ये समझने की चेष्टा करते हैं कि जन्मकुंडली में किस प्रकार विभिन्न ग्रह अपनी स्थिति के द्वारा इन केन्द्रों को स्पंदित करके, मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्धारण करते हैं । 1 . अगर सप्तमेश स्वगृ्ही होकर सप्तम स्थान में ही बैठा हो अथवा तीसरे भाव का स्वामी इस स्थान में स्थित हो तो वह मन में तीव्र अभिलाषाओं की उत्पत्ति का कारण बनता है। ऎसे व्यक्ति के मन मस्तिष्क में असीम ईच्छाएं निरन्तर जन्म लेती रहती हैं। अनुभव सिद्ध है कि चपटे सिर वाले जातक की अभिलाषाएं अधिक होती हैं और तंग सिर वाले की कम। 2 .यदि कुंडली में पांचवें भाव का स्वामी अष्टम स्थान में स्थित हो तो वह मस्तिष्क के अष्ट्म भाग को स्पंदित करते हुए प्रभावित करता है। जिससे जातक के अन्दर दृ्ड निश्चयी प्रवृ्ति का प्रादुर्भाव होता है। ऎसे व्यक्तियों में भीषण से भीषण मुसीबत से...
तुला,वृ्श्चिक,धनु,मकर,कुंभ तथा मीन राशीयों का स्वभावगत जीवन फल चंद्रमा के प्रभाव अनुसार ही किसी भी व्यक्ति की आदतें और रूचियां निर्धारित होती हैं। भारतीय ज्योतिष में चंद्रमा और सूर्य का विशेष महत्व है। क्योंकि इन्हीं के आधार पर काल गणना, सोलह संस्कार, मुहूर्त, तिथि, करण, योग, वार और नक्षत्रों की गणना की जाती है। इनमें भी चंद्रमा को विशेष महत्व प्राप्त है। इसका मुख्य कारण चंद्रमा की गतिशीलता है।यह सवा दो दिन में अपनी राशि परिवर्तित कर लेता है। इन सवा दो दिनों में विश्व में कहीं भी किसी प्राणी का जन्म हो ज्योतिष पद्धति अनुसार वही उसकी राशि होगी, जबकि पाश्चात्य ज्योतिष में सूर्य की राशि से अध्ययन किया जाता है। राशि निर्धारण की भारतीय पद्धति अधिक सूक्ष्म और वैज्ञानिक है। चूंकि चंद्रमा पृथ्वी का निकटस्थ उपग्रह है। यह मन की कल्पनाओं की भांति गतिशील है। इसीलिए वेदों में इसे "चंद्रमा मनसो जात:" कहा है। चंद्रमा की द्वादश राशि अनुसार आपकी आदतें और रूचि कैसी होती हैं, आईए जानते हैं तुला,वृ्श्चिक,धनु,मकर,कुंभ और मीन राशी के बारे में- तुला राशि: तुला राशि वाले सहायता एवं सहयोग करने वाले...
मेष,वृ्ष,मिथुन,कर्क,सिंह तथा कन्या राशीयों का स्वभावगत जीवन फल चंद्रमा के प्रभाव अनुसार ही किसी भी व्यक्ति की आदतें और रूचियां निर्धारित होती हैं। भारतीय ज्योतिष में चंद्रमा और सूर्य का विशेष महत्व है। क्योंकि इन्हीं के आधार पर काल गणना, सोलह संस्कार, मुहूर्त, तिथि, करण, योग, वार और नक्षत्रों की गणना की जाती है। इनमें भी चंद्रमा को विशेष महत्व प्राप्त है। इसका मुख्य कारण चंद्रमा की गतिशीलता है।यह सवा दो दिन में अपनी राशि परिवर्तित कर लेता है। इन सवा दो दिनों में विश्व में कहीं भी किसी प्राणी का जन्म हो ज्योतिष पद्धति अनुसार वही उसकी राशि होगी, जबकि पाश्चात्य ज्योतिष में सूर्य की राशि से अध्ययन किया जाता है। राशि निर्धारण की भारतीय पद्धति अधिक सूक्ष्म और वैज्ञानिक है। चूंकि चंद्रमा पृथ्वी का निकटस्थ उपग्रह है। यह मन की कल्पनाओं की भांति गतिशील है। इसीलिए वेदों में इसे "चंद्रमा मनसो जात:" कहा है। चंद्रमा की द्वादश राशि अनुसार आपकी आदतें और रूचि कैसी होती हैं,आईए जानते हैं-मेष,वृ्ष,मिथुन,कर्क,सिंह,कन्या राशीयों के बारे में मेष राशि : चंद्रमा की इस राशि पर स्थिति से व्यक्ति का त...
राशियां और धन [ मेष लगन :-मेष लगन वालों के लिये सूर्य शुभ,और धनदायक ग्रह है,क्योंकि त्रिकोण का स्वामी है,चन्द्र यद्यपि चौथी भाव का स्वामी है,है इसलिये मोक्ष का कारक होने के कारण अपनी नैसर्गिक शुभता को खो देता है,अत: पापी समझा जायेगा.अत: इसका छठे भाव या बारहवेम भाव में कमजोर होकर बिराजना धन तथा सुख के लिये अशुभ हो जायेगा,मंगल लगनेश है और अष्टमेश भी,हमेशा शुभ फ़ल देता है,बुध तीसरे और छठे भाव का स्वामी है,दोनो ही पापी भाव हैं,यदि केन्द्र या त्रिकोण में बलवान होगा,तो धन के सम्बन्ध में अशुभ फ़ल देगा.गुरु नवम और बारहवें भाव का स्वामी है,गुरु ट्रांसफ़र का प्रभाव रखने के कारण बहुत ही अच्छा फ़ल देगा,केन्द्र और मुख्य त्रिकोण में गुरु की स्थिति धन,भाग्य,राज्य कॄपा आदि देती है,शुक्र दूसरे और सातवें भाव का स्वामी है,लेकिन शुभ नही है,यदि बलवान होगा तो मंगल के प्रभाव के कारण हमेशा मानसिक और धन वाली प्रताडना देगा,लेकिन शुभ त्रिकोणाधिपति से सम्बन्ध रखता है,मतलब लगन से सम्बन्ध का प्रभाव शरीर के एचाहत,पंचम से सम्बन्ध परिवार से सम्बन्ध,और नवें भाव से सम्बन्ध पूर्वजों की मर्यादा और धर्म से लगाव रखना,यह सब ...